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Kanpur

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सोमवंशी राजपूत राजा कान्हा सोम के वंशज कान्हवंशी कहलाये और इसी से शहर का नाम पड़ा कान्हपुर। समझा जाता है कि कानपुर का मूल नाम कान्हपुर ही था। ऐसी मान्यता है कि यहीं पर ध्रुव ने जन्म लेकर परमात्मा की प्राप्ति के लिए बाल्यकाल में कठोर तप किया और ध्रुवतारा बनकर अमरत्व की प्राप्ति की। यह लखनऊ से केवल 80 किलोमीटर की दूरी पर है। अवध के नवाबों के शासनकाल के आखिरी दौर में पुराना कानपुरए पटकापुरए कुरसवाँए जूही तथा सीसामऊ गांवों से मिलकर यह जिला बना था। इससे पूर्व इस जिले का शासन कन्नौज तथा कालपी के शासकों के हाथों में रहा। चूंकि यह गंगा नदी के किनारे बसा शहर था और यातायात के साधन उपलब्ध थे अतः अंग्रेजों ने इसे औद्योगिक शहर के तौर पर विकसित किया। यहां शोभन मंदिर एक सिद्धधाम हैए नानाराव पार्कए ब्लूबर्ड चिड़ियाघरए राधा.कृष्ण मंदिरए पनकी हनुमान मंदिरए आदि प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। यहां छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय के अलावा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानए हरकोर्ट बडलर प्रौद्योगिकी संस्थानए चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थान हैं।