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Moradabad

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उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद जिला कभी चौपलाके नाम से जाना जाता था और यह हिमालय की तराई और कुमाऊं क्षेत्रों में व्यवसाय और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की प्राप्ति का प्रमुख केंद्र रहा है। वर्ष 1624 में इस इलाके पर रुस्तम खान ने कब्जा कर एक स्थान पर किले का निर्माण करवाया लेकिन बाद में इस शहर पर मुगल बादशाग शाहजहां के पुत्र मुराद बख्श ने कब्जा किया और इसे व्यवस्थित ढंग से बसाया और इसका नाम मुरादाबाद रख दिया। रामगंगा और गंगा नदियों के किनारे बसा मुरादाबाद आज सड़क और रेलवे के जरिये देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यहां गेहूं, कपास और गन्ने की खेती मुख्यरूप से होती है और इसके आसपास के क्षेत्रों में कपास मिलें हैं, बुवाई के कारखाने हैं और चीनी मिलें है। चीन और सूती वस्तत्र उद्योग यहां के प्रमुख उद्योग हैं। इसके अलावा मुरादाबाद को हैंडीक्राफ्ट विशेषतौर पर पीतल के कलात्मक बर्तनों के लिए पहचाना जाता है। यहां से भारत के अन्य इलाकों में ही नहीं विदेशों में भी पीतल के बर्तनों का निर्यात होता है।