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उत्तर प्रदेश के पूर्व में नेपाल की सीमा के सटा गोरखपुर प्रसिद्ध धार्मिक जिला है। यह बौद्धए हिंदूए मुस्लिमए जैन और सिख संतों का साधना स्थल रहा है। मध्ययुगीन काल में संत गोरखनाथ ने जब इस क्षेत्र को जब अपनी तपोस्थली बनाया तो उनके नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम गोरखपुर पड़ा। अब भी यहां गोरखनाथ मंदिर नाथ संप्रदाय की पीठ है। इसी पीठ से ताल्लुक रखते हैं उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। यही नहीं गोरखपुर महान संत परमहंस योगानंद की जन्मस्थली भी है। गोरखपुर जिले का नाम संत मत्स्येन्द्र नाथ के प्रमुख शिष्य संत गोरक्षनाथ या गोरखनाथ के नाम पर पड़ा। वे हठ योग का अभ्यास करते थे। उन्होंने अनेक वर्षों तक एक ही मुद्रा में धूनी रमाकर तपस्या की। गोरखनाथ मन्दिर में आज भी वह धूनी निरंतर सुलगती आ रही है। यहां पर कई ऐतिहासिक स्थल दर्शनीय हैं जिनमें बौद्धों के घरए 18वीं सदी का इमामबाड़ा और हिंदू धार्मिक ग्रंथों प्रकाशन संस्थान गीताप्रेस प्रमुख हैं। गोरखपुर के निकट ही संत कवि कबीर ने अपने देह त्यागी थीए साहित्यकार मुंशी प्रेम चंद लंबे समय यहां रहेए शायर रघुपति सहाय अपना उपनाम फिराक गोरखपुरी यहां रहने के आधार पर ही लगाते थे और प्रसिद्ध संगीतकार लक्ष्मीकांत का जन्म यहीं पर हुआ था।