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उत्तर प्रदेश का वह जिला जिसने भारत के हर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाईए उसका नाम है शाहजहांपुर। यहां जलालाबाद तहसील में जमदग्नि आश्रम और रामताल के निकट परशुराम के मंदिर में उनका फरसा आज भी देखा जा सकता है। शाहजहांपुर के पश्चिम में गोला गोकर्णनाथ मंदिर इसे त्रेता युग से जोड़ता है। यहां की प्रचलित किंवदंतियों के अनुसार पाण्डवों ने अज्ञातवास का कुछ समय यहां बिताया था। देश के पहले स्वातंत्र्य समर में भाग लेने वाले मौलवी अहमद उल्ला का सिर अंग्रेजों ने शहर के बीचों.बीच कोतवाली में ऊंचाई पर टांग दिया था ताकि इसे देखकर कोई उनके खिलाफ बगावत की हिम्मत ना कर सके। लेकिनए इस नगरी के राम प्रसाद बिस्मिलए अशफाक उल्ला और रोशन सिंह ने साथियों के साथ मिलकर काकोरी कांड कर डाला। इसे शदीदों की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां का कालीन उद्योगए मैक्डोनाल्ड शराब फैक्ट्रीए रौसर कोठी यानी चीनी मिल सबसे पुराने हैं। यहां सेना के लिए वस्त्र और पैराशूट बनाये जाते हैं। इसके अलावा यहां पर पेपर मिलए आटाए मैदा और चावल की मिलें हैं। इसी चरह यहां एक फर्टिलाइजर फैक्ट्री भी है जहां यूरिया का उत्पादन होता है।