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उत्तर प्रदेश में पूरब की ओर आगे बढ़ते हुए अंतिम जिला आता है कुशीनगर। यहां से 20 किलोमीटर आगे बिहार राज्य की शुरुआत हो जाती है। चीनी के यात्री ह्वेनसांग और फाह्यान के यात्रा वृत्तातों में इस प्राचीन क्षेत्र का उल्लेख मिलता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार यह स्थान त्रेता युग में भी आबाद था और और यहां प्रभु श्रीराम के के पुत्र कुश के राज्य की राजधानी था इसीलिए इसका नाम श्कुशावतीश् रहा और पालि साहित्य के ग्रंथ त्रिपटक में यह स्थान 16 महाजनपदों में से एक था। मल्ल राजाओं की राजधानी रहा यह क्षेत्र कुशावती से श्कुशीनाराश् हो गया और फिर कुशीनगर हुआ। ईसापूर्व पांचवी शताब्दी के अन्त में इस क्षेत्र में भगवान बुद्ध का आगमन हुआ था और यहां उन्होंने अपना अंतिम दिया। इसके बाद उनका महापरिनिर्वाण हो गया था। यही वजह है कि बौद्ध संप्रदाय के अनुयायियों के लिए यह स्थान अंतरराष्ट्रीय तीर्थ है और यहां देशी.विदेशी पर्यटक आते रहते हैं। बुधपूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर में एक महीने का मेला लगता है और प्रत्येक वर्ष की 10 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनए मिलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन भिक्षु संघए एक्युप़ेशर काउंसिल और प्रबुद्ध सोसाइटी द्वारा किया जाता है। कुशी नगर बौद्ध संप्रदाय के अनुयायियों के लिए कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय तीर्थ है। कुशीनगर के आसपास का क्षेत्र कृषि प्रधान है और यहां गेहूंए चावल और गन्ने की फसलें होती हैं। यहाँ बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालयए बुद्ध इण्टरमडिएट कालेजए प्रबुद्ध सोसाइटीएभिक्षु संघए एक्युप्रेशर परिषद्ए चन्दमणि निःशुल्क पाठशालाए महर्षि अरविन्द विद्या मंदिर तथा कई छोटे.छोटे विद्यालय भी हैं।