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प्रसिद्ध कवि देव की कर्मस्थली रहे इटावा का पुराना इष्टिकापुर था। ऐतिहासिक तौर पर भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मणि का मायका कुंदनपुर में रहा जो वर्तमान में कुंदरकोट के नाम से जाना जाता हैए इसी इटावा जिले में है। आगरा के दक्षिण.पूर्व में चंबल नदी के तट पर बसे इस जिले में अनेक हिंदू मंदिर हैं और 15वीं शताब्दी में बने किले के अवशेष भी यहां मौजूद हैं। यहां 16वीं शताब्दी में बनी एक जामा मस्जिद भी है। ग्वालियरए आगराए फर्रुखाबादए मैनपुरीए कानपुर आदि से सड़क मार्गों से जुड़े इटावा और इसके आसपास कपास और रेशम बुनाई के उद्योग और तिलहन मिलें हैं। जिले में धान मिलें भी बड़ी संख्या में है। यहां गेहूंए मक्काए जौ यहां की प्रमुख फसलें हैं। सुमेर सिंह का किलाए जुगरामऊ गांवए टिक्सी मंदिरए बाबरपुरए चकरनगरए जसौहारनए अहीरपुरए प्रताप नगर और सरसईनावर आदि यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां से भिंड की ओर जाने वाले मार्ग के जंगलों में प्रसिद्ध कालीवाहन मंदिर है। यहां हर साल एक बड़ा मेला लगता है जिसमें दूर.दूर से पर्यटक आते है।