भारत त्योहारों का देश है। जितने त्योहार हमारे देश में मनाए जाते हैं, किसी और देश में इसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती। इनमें कुछ त्योहार ऋतु तथा मौसम के अनुसार मनाए जाते हैं, तो कुछ त्योहार सांस्कृतिक या किसी घटना विशेष से संबंधित होकर संपन्न होते हैं। वास्तव में भारतीय संस्कृति के आदर्शों की झलक इन्ही त्योहारों में देखी जा सकती है।
तीज-त्योहार उसके वासियों के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। यदि दशहरे का त्योहार भगवान राम की विजय, उनकी सत्यता को प्रमाणित करने के लिए मनाया जाता है तो दीपावली भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में मनाते हैं। इन आदर्शों से प्रेरणा पाकर ही समाज उन्नत, समृद्धिशाली तथा विकासशील बनता है। इन त्योहारों के बिना तो हमारा जीवन नीरस और सूना हो जाएगा। ये त्योहार हमारे जीवन में परिवर्तन लेकर आते हैं।
मन का अंधेरा मिटाए दिवाली
जब हम अपने नीरस जीवन से ऊबने लगते हैं तो त्योहार हमारे लिए नवीन आशा लेकर आते हैं। निराशा पर आशा, बुराई पर अच्छाई व अंधकार पर रोशनी की जीत का पर्व दीपावली हर किसी के लिए खास होता है। इस त्योहार के साथ खुशियां जुड़ी हैं तो रोमांच भी। प्रत्येक व्यक्ति में कुछ-न-कुछ अच्छे गुण होते हैं। कुछ लोगों में सहनशीलता होती है, किसी में प्रेम, शक्ति और उदारता होती है, और हर दीपक जो आप जलाते हैं, इसी का प्रतीक है। स्वयं में ज्ञान का दीपक जलाकर आप इन गुणों को प्रकाशित करते हैं और ज्ञान प्राप्त कर आप अपने अस्तित्व के सभी पहलुओं को जागृत करते हैं।
पूरे घर को करें दीपों से रोशन
कहा जाता है कि लक्ष्मी वहीं आती हैं, जहां सकारात्मकता और स्वच्छता होती है। इसलिए सुख-समृद्धि को आकर्षित करने के लिए हस्तनिर्मित मिट्टी के दीयों को घर के प्रवेश द्वार पर जलाएं। इसमें कुछ लौंग और कपूर भी डालें। इसकी खुशबू से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा और परिवार के सदस्यों की आभा भी बढ़ेगी। अपने घर के सभी कोनों में गुग्गल धूप जलाएं। इससे वास्तु पुरुष मजबूत होते हैं। पूजा स्थल पर ओम, स्वस्तिक या त्रिशूल के प्रतीक बनाएं, इससे आपको सुरक्षा मिलेगी। नकारात्मक विचारों को बीमारियों को आमंत्रित करने के लिए जाना जाता है, इसलिए उनसे दूर रहना जरूरी है। दिवाली से एक दिन पहले नकारात्मकता को दूर करने का सबसे अच्छा दिन है। इस दिन की शुरुआत भगवान हनुमान की पूजा से करें, ताकि आप घर और अपने अंदर की नकारात्मकता को दूर कर सकें।
सजें चमकीले और चटक रंगों से
सादगी में भी उल्लास का रंग भरना हम भारतीय भलीभांति जानते हैं। उत्सव के समय अच्छे चमकीले रंग-बिरंगे कपड़े पहनें। शोधों में भी पाया गया है कि चमकीले और चटक रंग के कपड़े हमारी खुशी को बढ़ाते हैं। आपने घर को सजाया है और इस दिन आप सभी तैयार भी होंगे। तो इस यादगार पल को इंस्टाग्राम स्टोरीज के माध्यम से खास बना लें। सोशल मीडिया पर एक लाइव फीड बनाएं, ताकि आपके दोस्त और परिवार जो उत्सव का हिस्सा नहीं बन सकें, वे भी इसका हिस्सा बन सकें। ग्रैंड पेरेंट साथ नहीं हैं, तो वीडियो कॉल से उन्हें अपनी पूजा और सेलिब्रेशन में शामिल करें। अपने दोस्तों व परिवार के साथ वर्चुअल डिनर करें।
समझें उपहारों का मतलब
दिवाली उस कलह को भूलने का उत्सव है, जो आपने साल भर झेली थी। और हां, दीपावली पूजा का समय है। पूजा और प्रार्थना के आध्यात्मिक पहलू ही किसी उत्सव में गहराई जोड़ते हैं। इसलिए कोई भी उत्सव आध्यात्मिक होना चाहिए, क्योंकि इसके बिना उत्सव की कोई गहराई नहीं होती। सेवा की भावना के बिना भी उत्सव अधूरा है, जो कुछ हमने भगवान से प्राप्त किया है, हमें उसे दूसरों के साथ बांटना चाहिए। इस दिवाली आप अपने परिजनों, खास दोस्तों और रिश्तेदारों को उपहार अवश्य दें। आप ईको फ्रेंडली उपहार दे सकती हैं जैसे फेंग्शुई प्लांट, वायु को प्रदूषण मुक्त करने वाले पौधे, जूट बैग, खादी के कपड़े, सोलर पावर से चलने वाले गैजेट, अपने हाथों से बनाए ग्र्रींटग कार्ड आदि।
देसी वस्तुओं से सजाएं घर
इस त्योहार अपने घर की सजावट में स्थानीय चीजों को ज्यादा शामिल करें ताकि त्योहार का उत्साह दोगुना हो सके। दरअसल, ये चीजें लोगों के दिलों को छू जाती हैं और मन में किसी के लिए कुछ कर पाने का अहसास भी पूरा हो जाता है। इस दिवाली आप भी इको फ्रेंडली तत्वों, जैसे लकड़ी, स्टोन, सेरेमिक, मिट्टी के बर्तन और मैटेलिक शेड्स की चीजों को अपने घर की सज्जा में प्रमुखता दें। सिल्क, इक्कत और सिबोरी के बने हस्तनिर्मित परदे, कारपेट या बेडशीट्स घर की सुंदरता को बढ़ाते हैं। चटक व चमकीले रंगों के साथ न्यूट्रल शेड्स की जुगलबंदी करके घर को रॉयल लुक दें। अपने घर में स्ट्रॉन्ग कलर जैसे कि ब्लू ग्रीन, ब्लू और लाल को लाइम व ऑरेंज कलर से जोड़ें। ये घर के माहौल को सौम्य बनाते हैं। स्टेटमेंट लार्इंटग, फ्लोर लैंप व डिफ्यूज्ड लार्इंटग, ताजे फूल, सेंटेड डिफ्यूजर, सेंटेड कैंडल्स का इस्तेमाल करें। रोशनी का बदला अंदाज घर के अंदर खुशियों की बहार लाएगा।
त्योहारी सीजन में सावधानी भी जरूरी
बेशक दिवाली खुशी-खुशी मनाएं, लेकिन याद रहे कोरोना का जोखिम अभी टला नहीं है, इसलिए मास्क हर हाल में पहनें। दीया/ मोमबत्तियां जलाने से पहले सैनिटाइजर यूज न करें। अल्कोहल बेस्ड होने के कारण ये ज्वलनशील होते हैं, इससे आग लगने का खतरा रहेगा। अपने हाथों को साबुन और पानी से धोएं। सैनिटाइजर को आग से दूर रखें। बहुत जरूरी होने पर ही बाजार जाएं, लेकिन घर के बुजुर्ग व बच्चों को बिल्कुल न लेकर जाएं।
दिवाली पूजन से आपके परिवार को प्राप्त होगा वैभव
दिवाली यानी पांच दिनों तक चलने वाला त्योहारों का लंबा सिलसिला है, जो धरतेरस से शुरू होता है और भाई दूज पर जाकर खत्म होता है। दिवाली के अवसर पर सुख-समृद्धि, धन-धान्य की बढ़ोतरी के लिए घर की बहुत अच्छी तरह से सफाई करें और दरवाजे पर रंगोली अवश्य बनाएं। ऐसा करने से लक्ष्मी मां प्रसन्न होती हैं और धन-धान्य के साथ वैभव भी प्रदान करती हैं। दिवाली के दिन विराजमान अवस्था में बैठी मां लक्ष्मी जी की ही पूजा करें। लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी और सरस्वती माता की भी तस्वीर होनी चाहिए, क्योंकि गणेश जी हर विघ्न का नाश करते है और सरस्वती माता उन विघ्नों को दूर करने के लिए बुद्धि देती है । इस दिन 11, 21 या 31 की शुभ संख्या में दीप दान करें।
ऐसे बनाएं सकारात्मक और उत्सवी माहौल
’ घर के मुख्य द्वार के पास रंग-बिरंगे गलीचे या पायदान लगाएं। आप अपने फर्नीचर के अनुसार ही छोटे और बड़े पायदानों को लगा सकती हैं।
’ रंगीन आर्टिफिशियल फूलों से अपने घर में जान भर सकती हैं। इनका रख-रखाव आसान होता है।
’ कुशंस पर मुलायम कवर चढ़ाएं। आप अपने कमरे के फर्नीचर और परदों से मिलते-जुलते कई रंगों के कुशन कवर्स भी लगा सकती हैं।
’ मोमबत्तियां कमरे को अलग लुक देती हैं। अलग-अलग खुशबुओं वाली मोमबत्तियां लगाएं।
’ घर में कई जगहों पर पूरे परिवार की तस्वीरों को वुडन फ्रेम करवाकर लगाएं।
’ फर्नीचर को ऐसे सेट करें कि कई सारे लोग बैठ सकें। जैसे एक छोटी टेबल के चारों तरफ कई चेयर रखें।
’ सेंटर टेबल और दूसरी टेबल्स के लिए प्लास्टिक कवर का इस्तेमाल कर सकती हैं।
दिवाली पर दिल खोलकर करें मेहमानों की आवभगत
दिवाली का त्योहार अपने साथ कई सारी खुशियां और सकारात्मकता लेकर आता है। यह रिश्तों में मिठास घोलने और उन्हें प्रगाढ़ करने का भी त्योहार है। कई लोग घर पर दिवाली पार्टी भी आयोजित करते हैं लेकिन मेहमाननवाजी भी एक कला है। इसलिए मेहमाननवाजी के गुर जरूर सीखें और अपने मेहमान का दिख खोलकर स्वागत अवश्य कीजिए।
हमारी मेजबानी ऐसी होनी चाहिए, जो मेहमानों के लिए यादगार हो जाए। इसलिए इसकी तैयारी पहले से ही करें। घर की साफ-सफाई पहले ही निपटा लें, सारे सामान सलीके से व्यवस्थित कर लें। मेहमान सबसे पहले आपके घर में इन्हीं बातों पर गौर करते हैं।
स्वागत का इंतजाम
ध्यान रखें कि आप मेजबान हैं और आपको मेहमानों का खयाल रखना है। अगर बच्चे हैं तो उन्हें भी ठीक से तैयार करें। सभी लोगों से गर्मजोशी और आत्मीयता से मिलें। रिश्ते और उम्र के लिहाज से ही लोगों से मिलें और मान-सम्मान देने में हिचकें बिल्कुल नहीं। घर के बाकी सदस्यों से परिचय कराना न भूलें। बाथरूम साफ-सुथरा रखें, खुशबू के लिए फ्रेशनर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। जरूरी सामान जैसे तौलिया, साबुन की भी व्यवस्था रखें।
मेहमान के साथ सहज रहें
मेहमानों के साथ बिल्कुल सहज और खुश रहें और गैरजरूरी औपचारिकता से बचें। तभी मेहमान भी आपके साथ का आनंद ले पाएंगे। एक अच्छे मेजबान की पहचान है कि माहौल खुशनुमा बनाए रखें। त्योहार के मौके पर गंभीर विषयों पर चर्चा और बहस से बचें। अतिथि अगर आपके लिए कोई उपहार लेकर आए हैं तो इसे बड़े ही प्यार से स्वीकार करें और इसकी प्रंशसा भी करें। भले ही आपको वह चीज पसंद हो या नहीं। विदा करते हुए मेहमानों को आप भी कुछ भेंट जरूर करें। इससे उन्हें भी लगेगा कि आपने उन्हें प्यार से स्वीकार किया है।
खानपान की तैयारी पहले करें
खानपान की शुरुआत तरल पदार्थ से करें। खाने और नमकीन की तैयारियां पहले से रखें। खाना परोसने संबंधी तैयारियां पहले ही कर लें, क्योंकि मेहमानों के सामने टेबल लगाना अटपटा लगता है। कई मेहमान जल्दबाजी में होते हैं। ऐसे में सलीके से खाना परोसना, खिलाना कई बार टेढ़ी खीर हो जाता है। इसलिए घर के दूसरे सदस्यों की मदद लेने से न हिचकें। खाना मेहमानों के साथ ही खाएं। इससे अतिथि आपके अपनेपन को महसूस करेगा। लोग ज्यादा हों तो खाना बनाने के बजाय बाहर से मंगा लेना भी एक अच्छा विकल्प है। इससे मेहमानों को देने के लिए समय भी ठीक से मिल सकेगा।
शिष्टाचार की कसौटी
अक्सर बड़ों के साथ बच्चे ऊबने लगते हैं। इसलिए हो सके तो बच्चों को अलग कमरे में व्यस्त करें ताकि बड़े और छोटे, दोनों ही सहज रह सकें। इसके अलावा, मेहमान ऊबें नहीं या कई बार साथ में बच्चे होने की वजह से हम टीवी चला कर छोड़ देते हैं। लेकिन ये खराब शिष्टाचार की पहचान हैं। अतिथि हमारे घर टीवी कार्यक्रम देखने नहीं आते हैं, बल्कि यह एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका होता है। सारी आवभगत के बाद मेहमानों की विदाई हमारे शिष्टाचार की असली परख होती है। मेहमानों को निपटाएं नहीं। उनके खुद ही निकलने का इंतजार करें। वापसी तोहफा जरूर दें।
दिवाली पर इन्हें भी ना भूलें
’ घर से बाहर निकलें और किसी जरूरतमन्द को ही मोमबत्ती, दीये, मिठाई दीजिए। आप स्वयं को ‘सार्थक’ महसूस करेंगे।
’ ऐसे लोगों को बेहिचक फोन करें और संदेश भेजें, जो बरसों से भूले बिसरे हो। फिर वो चाहे आपका पुराना पड़ोसी या दोस्त हो।
’ वो लोग जो हमें सालभर में अपना श्रम देते हैं, उन्हें एक दिन की छुट्टी और उपयोगी उपहार जरूर दें। इनमें घरेलू सहायिका, कार चालक और सुरक्षा गार्ड हो सकते हैं।
’ दिवाली की सफाई के दौरान छांटे हुए पुराने कपड़े, स्टेशनरी और अन्य सामान किसी भी नजदीकी बस्ती या जरूरतमन्दों में बांट दें।
दिवाली पूजन इन बातों को रखें खास ख्याल
दिवाली पूजन की तैयारियों का दायित्व गृहणियों पर ही होता है। पूजन महज औपचारिकता या धार्मिक रीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपके परिवार की सुख-समृद्धि और शांति से जुड़ा है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि दिवाली पूजन पर किन विशेष बातों का ध्यान रखा जाएगा।
’ दिवाली पूजन की तैयारी के पहले कार्य के रूप में घर से अवांछित सामान, पुराने कपड़े, जूते, डिब्बे आदि तुरंत हटा दें। ये सामान नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत होते हैं और आर्थिक अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते है । दीपावली से पूर्व घर व दफ्तरों की जो साफ-सफाई की जाती है, वह वास्तव में माता लक्ष्मी को आमंत्रित करने का ही प्रतीक है।
’ इस बात का विशेष रूप से ख्याल रखें कि घर के जिस कक्ष में पूजा स्थल बनाएं, वहां पर ताजा हवा और रोशनी का पर्याप्त प्रबंध होना चाहिए।
’ इस बात पर विशेष रूप से तवज्जो दें कि पूजन में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं-चित्रों के साथ आप अपने घर के मृतक परिजनों और अपने पूर्वजों के चित्र न रखें।
’ पूजन कक्ष में पवित्रता का खास तौर पर ख्याल रखना चाहिए। वहां पर चमड़े का सामान, जूते-चप्पल आदि न रखें और न ही किसी अन्य को ले जाने दें।
’ पूजन में अर्पण करने के लिए जहां तक संभव हो सके ताजे फल व फूलों का उपयोग ही करें। भूमि पर गिरा हुआ फूल, जिसकी पंखुड़ियां टूटी हुई हों, आग में झुलसा हुआ फूल व सूंघा हुआ फूल पूजा में कभी भी किसी भी हालत में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
’ बासी फूल, पत्ते व जल पूजन में इस्तेमाल नहीं करें। लेकिन तुलसी व गंगाजल कभी बासी नहीं होते।
’ फल-फूल जैसे उगते हैं, उन्हें वैसे ही चढ़ाना चाहिए यानी उन्हें तोड़ना या काटना नहीं चाहिए।
’ पूजन के दौरान ध्वनि का विशेष महत्व है। शंख व घंटानाद न सिर्फ देवों को प्रिय है, बल्कि इससे वातावरण शुद्धि भी होती है। यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुका है कि शंख ध्वनि से बैक्टीरिया नष्ट होते हैं और आपके घर और परिवार को नकारात्मक ऊर्जा से बचाते हैं।
’ पूजा स्थल के लिए सर्वोत्तम स्थान ईशान कोण अर्थात उत्तर व पूर्व का समागम स्थल है।
’ देवी-देवताओं की बड़ी प्रतिमाओं की स्थापना पूजा स्थल में न करें। गृहस्थों को अंगूठे के एक पर्व से लेकर एक बलिस्त तक की प्रतिमा की स्थापना घर के पूजा स्थल में करनी चाहिए।
उत्तर दिशा में तिजोरी रखने से खुलेंगे धन प्राप्ति के रास्ते
वास्तुशास्त्र के अनुसार तिजोरी या धन के लिए कक्ष की सर्वोत्तम दिशा उत्तर हैं। उत्तर दिशा के स्वामी देवता कुबेर है । इसका स्वामी बुध है। बुध से मनुष्यों की वृद्धि विवेक, वाणी, क्षमता, कार्यकुशलता कोष आदि का विचार किया जाता है। इसलिए धन तथा तिजोरी रखने का सर्वोत्तम दिशा उत्तर है। उत्तर के अतिरिक्त तिजोरी पूर्व तथा ईशान कोण में भी रख सकते है, परन्तु दक्षिण, नैऋत्र्य, वायव्य या आग्नेय कोण में कदापि न रखें। दक्षिण नैऋत्र्य में तिजोरी रखने पर धन का नाश होता है। धन, बीमारी, दुर्घटना आदि में व्यय हो जाता है। वायव्य तथा आग्नेय कोणों में तिजोरी रखने से धन का अत्यधिक अपव्यय होता है। इस प्रकार की स्थितियों में धन आता है, परन्तु रुकता नहीं है, इसलिए वास्तु के अनुसार तिजोरी उत्तर दिशा में रखें। ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि तिजोरी की शुभ दिशाओं में इस प्रकार रखें कि तिजोरी सदैव पूर्व या उत्तर दिशा की ओर खुले।